दरमियाँ ग़ज़ल संग्रह 72
1 2122 121 122 22 इन हवाओं को आज बता दो यारों आँधियों में चिराग़ जला दो यारों बात करते बहुत क़िस्मत की , उनको कुछ हुनर का , कमाल दिखा दो यारों जो करें भेदभाव , अगर मानव में मज़हबी वह दिवार , गिरा दो यारों रौशनी की बहार , चले गुलशन में प्यार के फूल-पात खिला दो यारों , [11:09 AM, 9/3/2019] वैभव बेख़बर: 2 तीर नज़र ना ही खंज़र से पत्थर टूटेगा पत्थर से दरिया पर रौब जमाते हैं डरते हैं लोग समुंदर से चहरे पर मुस्कान लिए हैं पर घायल हैं सब अंदर से बंज़र होने से बच जाती गर होती बारिश अम्बर से दूरी न घटे , बैठे बैठे मन्ज़िल होती पास सफर से 3 वैभव बेख़...